Anti leprosy day awareness at aam shc Rajatau atrauli aligarh up
आयुष्मान आरोग्य मंदिर रजातऊ में कुष्ठ निवारण दिवस पर ली गई शपथ, आशा कार्यकर्ताओं को बांटी गईं दवा किट
स्थान: आयुष्मान आरोग्य मंदिर, रजातऊ, अतरौली (अलीगढ़) दिनांक: 30 जनवरी 2026
अतरौली (अलीगढ़): राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि और 'विश्व कुष्ठ निवारण दिवस' के अवसर पर आज अतरौली ब्लॉक के आयुष्मान आरोग्य मंदिर, रजातऊ में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के प्रति भ्रांतियों को मिटाना और कुष्ठ मुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लेना था।
कुष्ठ मुक्ति की शपथ (Oath Taking)
कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इसके पश्चात, स्वास्थ्य अधिकारियों, कर्मचारियों और उपस्थित ग्रामीणों ने एक स्वर में "कुष्ठ के विरुद्ध शपथ" ली। सभी ने संकल्प लिया कि वे कुष्ठ रोगियों के साथ भेदभाव नहीं करेंगे और समाज में इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाएंगे ताकि एक स्वस्थ और सक्षम समाज का निर्माण हो सके।
लक्षण, स्क्रीनिंग और उपचार पर जागरूकता
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और प्रसिद्ध साइकोलॉजिस्ट पवन कुमार चौहान द्वारा आयोजित वर्कशाप में कुष्ठ रोग के लक्षण और बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि कुष्ठ रोग कोई दैवीय प्रकोप नहीं, बल्कि एक जीवाणु जनित बीमारी है जो पूरी तरह साध्य (इलाज योग्य) है।
मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की गई:
लक्षण (Symptoms): शरीर पर किसी भी तरह का हल्का या तांबे के रंग का दाग, जिसमें सुन्नपन हो (पसीना न आता हो, जलन या चुभन महसूस न होती हो), कुष्ठ रोग हो सकता है।
स्क्रीनिंग (Screening): यदि किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या आयुष्मान आरोग्य मंदिर में जांच करानी चाहिए।
उपचार (Treatment): कुष्ठ रोग का इलाज 'मल्टी ड्रग थेरेपी' (MDT) द्वारा सभी सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है। समय पर इलाज से दिव्यांगता से बचा जा सकता है।
आशा ड्रग किट का वितरण और रिकॉर्ड संधारण
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जमीनी स्तर की स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं यानी 'आशा' (ASHA) को सशक्त बनाना था।
रिकॉर्ड मेंटेनेंस: सभी आशा कार्यकर्ताओं के ड्रग किट रजिस्टर और रिकॉर्ड की जांच की गई। उन्हें निर्देश दिए गए कि वे अपने क्षेत्र में दवाओं के वितरण का सही रिकॉर्ड समय पर अपडेट रखें।
किट वितरण: आशा कार्यकर्ताओं को उनकी ड्रग किट (Drug Kit) के लिए आवश्यक दवाइयां (जैसे पैरासिटामोल, ओआरएस, आयरन की गोलियां आदि) और अन्य जरूरी सामग्री वितरित की गई, ताकि गांव स्तर पर प्राथमिक उपचार में कोई बाधा न आए।
निष्कर्ष
कार्यक्रम के अंत में सभी से अपील की गई कि वे अपने आस-पड़ोस में निगरानी रखें और यदि कोई संभावित कुष्ठ रोगी मिले, तो उसे इलाज के लिए प्रेरित करें। "कुष्ठ मिटाना है, समाज को जगाना है" के नारे के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। संगिनी बहनजी एवं आशाओं के साथ जन समुदाय की भी भागीदारी रही.



Comments
Post a Comment